श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

शोणिताख्ये पुरे रम्ये स राज्यमकरोत् पुरा।

तस्य शम्भोः प्रसादेन किंकरा इव तेऽमराः।

सहस्रबाहुर्वाद्येन ताण्डवेऽतोषयन्मृडम्॥ ४

śoṇitākhye pure ramye sa rājyamakarot purā|

tasya śambhoḥ prasādena kiṃkarā iva te'marāḥ|

sahasrabāhurvādyena tāṇḍave'toṣayanmṛḍam|| 4

अर्थ

उन दिनों वह परम रमणीय शोणितपुरमें राज्य करता था। भगवान् शंकरकी कृपासे इन्द्रादि देवता नौकर-चाकरकी तरह उसकी सेवा करते थे। उसके हजार भुजाएँ थीं। एक दिन जब भगवान् शंकर ताण्डवनृत्य कर रहे थे, तब उसने अपने हजार हाथोंसे अनेकों प्रकारके बाजे बजाकर उन्हें प्रसन्‍न कर लिया॥ ४॥

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