श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

दोःसहस्रं त्वया दत्तं परं भाराय मेऽभवत्।

त्रिलोक्यां प्रतियोद्धारं न लभे त्वदृते समम्॥ ८

doḥsahasraṃ tvayā dattaṃ paraṃ bhārāya me'bhavat|

trilokyāṃ pratiyoddhāraṃ na labhe tvadṛte samam|| 8

अर्थ

भगवन्! आपने मुझे एक हजार भुजाएँ दी हैं, परन्तु वे मेरे लिये केवल भाररूप हो रही हैं। क्योंकि त्रिलोकीमें आपको छोड़कर मुझे अपनी बराबरीका कोई वीर-योद्धा ही नहीं मिलता, जो मुझसे लड़ सके॥ ८॥

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