श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

कण्डूत्या निभृतैर्दोर्भिर्युयुत्सुर्दिग्गजानहम्।

आद्यायां चूर्णयन्‍नद्रीन् भीतास्तेऽपि प्रदुद्रुवुः॥ ९

kaṇḍūtyā nibhṛtairdorbhiryuyutsurdiggajānaham|

ādyāyāṃ cūrṇayannadrīn bhītāste'pi pradudruvuḥ|| 9

अर्थ

आदिदेव! एक बार मेरी बाहोंमें लड़नेके लिये इतनी खुजलाहट हुई कि मैं दिग्गजोंकी ओर चला। परन्तु वे भी डरके मारे भाग खड़े हुए। उस समय मार्गमें अपनी बाहोंकी चोटसे मैंने बहुतसे पहाड़ोंको तोड़-फोड़ डाला था’॥ ९॥

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