कोटरा नामकी एक देवी बाणासुरकी धर्ममाता थी। वह अपने उपासक पुत्रके प्राणोंकी रक्षाके लिये बाल बिखेरकर नंग-धड़ंग भगवान् श्रीकृष्णके सामने आकर खड़ी हो गयी॥ २०॥✎ 2123
तन्माता कोटरा नाम नग्ना मुक्तशिरोरुहा।
पुरोऽवतस्थे कृष्णस्य पुत्रप्राणरिरक्षया॥ २०
कोटरा नामकी एक देवी बाणासुरकी धर्ममाता थी। वह अपने उपासक पुत्रके प्राणोंकी रक्षाके लिये बाल बिखेरकर नंग-धड़ंग भगवान् श्रीकृष्णके सामने आकर खड़ी हो गयी॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 532) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/63/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)