॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.63.32
तस्यास्यतोऽस्त्राण्यसकृच्चक्रेण क्षुरनेमिना।
चिच्छेद भगवान् बाहून् शाखा इव वनस्पतेः॥ ३२
tasyāsyato'strāṇyasakṛccakreṇa kṣuraneminā|
ciccheda bhagavān bāhūn śākhā iva vanaspateḥ|| 32
अर्थ
जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि बाणासुरने तो बाणोंकी झड़ी लगा दी है, तब वे छुरेके समान तीखी धारवाले चक्रसे उसकी भुजाएँ काटने लगे, मानो कोई किसी वृक्षकी छोटी-छोटी डालियाँ काट रहा हो॥ ३२॥