जब भक्तवत्सल भगवान् शंकरने देखा कि बाणासुरकी भुजाएँ कट रही हैं, तब वे चक्रधारी भगवान् श्रीकृष्णके पास आये और स्तुति करने लगे॥ ३३॥
बाहुषुच्छिद्यमानेषु बाणस्य भगवान् भवः।
भक्तानुकम्प्युपव्रज्य चक्रायुधमभाषत॥ ३३
जब भक्तवत्सल भगवान् शंकरने देखा कि बाणासुरकी भुजाएँ कट रही हैं, तब वे चक्रधारी भगवान् श्रीकृष्णके पास आये और स्तुति करने लगे॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 533) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/63/33/