श्रीकृष्णसे इस प्रकार अभयदान प्राप्त करके बाणासुरने उनके पास आकर धरतीमें माथा टेका, प्रणाम किया और अनिरुद्धजीको अपनी पुत्री ऊषाके साथ रथपर बैठाकर भगवान्के पास ले आया॥ ५०॥
इति लब्ध्वाभयं कृष्णं प्रणम्य शिरसासुरः।
प्राद्युम्निं रथमारोप्य सवध्वा समुपानयत्॥ ५०
श्रीकृष्णसे इस प्रकार अभयदान प्राप्त करके बाणासुरने उनके पास आकर धरतीमें माथा टेका, प्रणाम किया और अनिरुद्धजीको अपनी पुत्री ऊषाके साथ रथपर बैठाकर भगवान्के पास ले आया॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 535) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/63/50/