इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने महादेवजीकी सम्मतिसे वस्त्रालंकारविभूषित ऊषा और अनिरुद्धजीको एक अक्षौहिणी सेनाके साथ आगे करके द्वारकाके लिये प्रस्थान किया॥ ५१॥
अक्षौहिण्या परिवृतं सुवासःसमलंकृतम्।
सपत्नीकं पुरस्कृत्य ययौ रुद्रानुमोदितः॥ ५१
इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने महादेवजीकी सम्मतिसे वस्त्रालंकारविभूषित ऊषा और अनिरुद्धजीको एक अक्षौहिणी सेनाके साथ आगे करके द्वारकाके लिये प्रस्थान किया॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 535) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/63/51/