श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.64.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 64 · अथ चतुःषष्टितमोऽध्यायः

तां नीयमानां तत्स्वामी दृष्ट्वोवाच ममेति तम्।

ममेति प्रतिग्राह्याह नृगो मे दत्तवानिति॥ १७

tāṃ nīyamānāṃ tatsvāmī dṛṣṭvovāca mameti tam|

mameti pratigrāhyāha nṛgo me dattavāniti|| 17

अर्थ

जब उस गायको वे ब्राह्मण ले चले, तब उस गायके असली स्वामीने कहा—‘यह गौ मेरी है।’ दान ले जानेवाले ब्राह्मणने कहा—‘यह तो मेरी है, क्योंकि राजा नृगने मुझे इसका दान किया है’॥ १७॥

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