श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.64.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 64 · अथ चतुःषष्टितमोऽध्यायः

चर्मजैस्तान्तवैः पाशैर्बद‍्ध्वा पतितमर्भकाः।

नाशक्‍नुवन् समुद्धर्तुं कृष्णायाचख्युरुत्सुकाः॥ ४

carmajaistāntavaiḥ pāśairbaddhvā patitamarbhakāḥ|

nāśaknuvan samuddhartuṃ kṛṣṇāyācakhyurutsukāḥ|| 4

अर्थ

परन्तु जब वे राजकुमार उस गिरे हुए गिरगिटको चमड़े और सूतकी रस्सियोंसे बाँधकर बाहर न निकाल सके, तब कुतूहलवश उन्होंने यह आश्‍चर्यमय वृत्तान्त भगवान् श्रीकृष्णके पास जाकर निवेदन किया॥ ४॥

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