जगत्के जीवनदाता कमलनयन भगवान् श्रीकृष्ण उस कूएँपर आये। उसे देखकर उन्होंने बायें हाथसे खेल-खेलमें—अनायास ही उसको बाहर निकाल लिया॥ ५॥
तत्रागत्यारविन्दाक्षो भगवान् विश्वभावनः।
वीक्ष्योज्जहार वामेन तं करेण स लीलया॥ ५
जगत्के जीवनदाता कमलनयन भगवान् श्रीकृष्ण उस कूएँपर आये। उसे देखकर उन्होंने बायें हाथसे खेल-खेलमें—अनायास ही उसको बाहर निकाल लिया॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.64.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 537) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/64/5/