श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.65.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 65 · अथ पञ्चषष्टितमोऽध्यायः

कामं विहृत्य सलिलादुत्तीर्णायासिताम्बरे।

भूषणानि महार्हाणि ददौ कान्तिः शुभां स्रजम्॥ २९

kāmaṃ vihṛtya salilāduttīrṇāyāsitāmbare|

bhūṣaṇāni mahārhāṇi dadau kāntiḥ śubhāṃ srajam|| 29

अर्थ

जब वे यथेष्ट जल-विहार करके यमुनाजीसे बाहर निकले, तब लक्ष्मीजीने उन्हें नीलाम्बर, बहुमूल्य आभूषण और सोनेका सुन्दर हार दिया॥ २९॥

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