श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.65.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 65 · अथ पञ्चषष्टितमोऽध्यायः

चिरं नः पाहि दाशार्ह सानुजो जगदीश्‍वरः।

इत्यारोप्यांकमालिङ्‌ग्‍य नेत्रैः सिषिचतुर्जलैः॥ ३

ciraṃ naḥ pāhi dāśārha sānujo jagadīśvaraḥ|

ityāropyāṃkamāliṅgya netraiḥ siṣicaturjalaiḥ|| 3

अर्थ

यह कहकर कि ‘बलरामजी! तुम जगदीश्‍वर हो, अपने छोटे भाई श्रीकृष्णके साथ सर्वदा हमारी रक्षा करते रहो, उनको गोदमें ले लिया और अपने प्रेमाश्रुओंसे उन्हें भिगो दिया॥ ३॥✎ 1699

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1699 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आप-लोगोंको → आपलोगोंको

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