श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.66.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 66 · अथ षट्षष्टितमोऽध्यायः

अथ षट्षष्टितमोऽध्यायः

पौण्ड्रक और काशिराजका उद्धार

श्रीशुक उवाच

नन्दव्रजं गते रामे करूषाधिपतिर्नृप।

वासुदेवोऽहमित्यज्ञो दूतं कृष्णाय प्राहिणोत्॥ १

nandavrajaṃ gate rāme karūṣādhipatirnṛpa|

vāsudevo'hamityajño dūtaṃ kṛṣṇāya prāhiṇot|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब भगवान् बलरामजी नन्दबाबाके व्रजमें गये हुए थे, तब पीछेसे करूष देशके अज्ञानी राजा पौण्ड्रकने भगवान् श्रीकृष्णके पास एक दूत भेजकर यह कहलाया कि ‘भगवान् वासुदेव मैं हूँ’॥ १॥

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