श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.66.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 66 · अथ षट्षष्टितमोऽध्यायः

त्वं वासुदेवो भगवानवतीर्णो जगत्पतिः।

इति प्रस्तोभितो बालैर्मेन आत्मानमच्युतम्॥ २

tvaṃ vāsudevo bhagavānavatīrṇo jagatpatiḥ|

iti prastobhito bālairmena ātmānamacyutam|| 2

अर्थ

मूर्खलोग उसे बहकाया करते थे कि ‘आप ही भगवान् वासुदेव हैं और जगत‍्की रक्षाके लिये पृथ्वीपर अवतीर्ण हुए हैं।’ इसका फल यह हुआ कि वह मूर्ख अपनेको ही भगवान् मान बैठा॥ २॥

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