श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.67.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 67 · अथ सप्तषष्टितमोऽध्यायः

तस्य धार्ष्ट्यं कपेर्वीक्ष्य तरुण्यो जातिचापलाः।

हास्यप्रिया विजहसुर्बलदेवपरिग्रहाः॥ १२

tasya dhārṣṭyaṃ kapervīkṣya taruṇyo jāticāpalāḥ|

hāsyapriyā vijahasurbaladevaparigrahāḥ|| 12

अर्थ

युवती स्त्रियाँ स्वभावसे ही चंचल और हास-परिहासमें रुचि रखनेवाली होती हैं। बलरामजीकी स्त्रियाँ उस वानरकी ढिठाई देखकर हँसने लगीं॥ १२॥

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