श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.67.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 67 · अथ सप्तषष्टितमोऽध्यायः

ता हेलयामास कपिर्भ्रूक्षेपैः सम्मुखादिभिः।

दर्शयन् स्वगुदं तासां रामस्य च निरीक्षतः॥ १३

tā helayāmāsa kapirbhrūkṣepaiḥ sammukhādibhiḥ|

darśayan svagudaṃ tāsāṃ rāmasya ca nirīkṣataḥ|| 13

अर्थ

अब वह वानर भगवान् बलरामजीके सामने ही उन स्त्रियोंकी अवहेलना करने लगा। वह उन्हें कभी अपनी गुदा दिखाता तो कभी भौंहें मटकाता, फिर कभी-कभी गरज-तरजकर मुँह बनाता, घुड़कता॥ १३॥

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