श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

तं सन्‍निरीक्ष्य भगवान् सहसोत्थितः श्री-

पर्यङ्कतः सकलधर्मभृतां वरिष्ठः।

आनम्य पादयुगलं शिरसा किरीट-

जुष्टेन साञ्जलिरवीविशदासने स्वे॥ १४

taṃ sannirīkṣya bhagavān sahasotthitaḥ śrī-

paryaṅkataḥ sakaladharmabhṛtāṃ variṣṭhaḥ|

ānamya pādayugalaṃ śirasā kirīṭa-

juṣṭena sāñjaliravīviśadāsane sve|| 14

अर्थ

नारदजीको देखते ही समस्त धार्मिकोंके मुकुटमणि भगवान् श्रीकृष्ण रुक्मिणीजीके पलँगसे सहसा उठ खड़े हुए। उन्होंने देवर्षि नारदके युगलचरणोंमें मुकुटयुक्त सिरसे प्रणाम किया और हाथ जोड़कर उन्हें अपने आसनपर बैठाया॥ १४॥✎ 1704

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1704 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मुकुट-मणि → मुकुटमणि

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