देवर्षि नारदने देखा कि भगवान् श्रीकृष्ण किसीके साथ युद्धकी बात कर रहे हैं, तो किसीके साथ सन्धिकी। कहीं भगवान् बलरामजीके साथ बैठकर सत्पुरुषोंके कल्याणके बारेमें विचार कर रहे हैं॥ ३१॥
कुर्वन्तं विग्रहं कैश्चित् सन्धिं चान्यत्र केशवम्।
कुत्रापि सह रामेण चिन्तयन्तं सतां शिवम्॥ ३१
देवर्षि नारदने देखा कि भगवान् श्रीकृष्ण किसीके साथ युद्धकी बात कर रहे हैं, तो किसीके साथ सन्धिकी। कहीं भगवान् बलरामजीके साथ बैठकर सत्पुरुषोंके कल्याणके बारेमें विचार कर रहे हैं॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 564) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/31/