देवताओंके भी आराध्यदेव भगवन्! चौदहों भुवन आपके सुयशसे परिपूर्ण हो रहे हैं। अब मुझे आज्ञा दीजिये कि मैं आपकी त्रिभुवन-पावनी लीलाका गान करता हुआ उन लोकोंमें विचरण करूँ’॥ ३९॥✎ 1706
अनुजानीहि मां देव लोकांस्ते यशसाऽऽप्लुतान्।
पर्यटामि तवोद्गायन् लीलां भुवनपावनीम्॥ ३९
देवताओंके भी आराध्यदेव भगवन्! चौदहों भुवन आपके सुयशसे परिपूर्ण हो रहे हैं। अब मुझे आज्ञा दीजिये कि मैं आपकी त्रिभुवन-पावनी लीलाका गान करता हुआ उन लोकोंमें विचरण करूँ’॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 565) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)