श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

विदाम योगमायास्ते दुर्दर्शा अपि मायिनाम्।

योगेश्‍वरात्मन् निर्भाता भवत्पादनिषेवया॥ ३८

vidāma yogamāyāste durdarśā api māyinām|

yogeśvarātman nirbhātā bhavatpādaniṣevayā|| 38

अर्थ

‘योगेश्‍वर! आत्मदेव! आपकी योगमाया ब्रह्माजी आदि बड़े-बड़े मायावियोंके लिये भी अगम्य है। परन्तु हम आपकी योगमायाका रहस्य जानते हैं; क्योंकि आपके चरणकमलोंकी सेवा करनेसे वह स्वयं ही हमारे सामने प्रकट हो गयी है॥ ३८॥✎ 1706

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1706 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: योग-माया → योगमाया

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