श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

प्रासादलक्षैर्नवभिर्जुष्टां स्फाटिकराजतैः।

महामरकतप्रख्यैः स्वर्णरत्‍नपरिच्छदैः॥ ५

prāsādalakṣairnavabhirjuṣṭāṃ sphāṭikarājataiḥ|

mahāmarakataprakhyaiḥ svarṇaratnaparicchadaiḥ|| 5

अर्थ

द्वारकापुरीमें स्फटिकमणि और चाँदीके नौ लाख महल थे। वे फर्श आदिमें जड़ी हुई महामरकतमणि (पन्‍ने) की प्रभासे जगमगा रहे थे और उनमें सोने तथा हीरोंकी बहुत-सी सामग्रियाँ शोभायमान थीं॥ ५॥

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