यशोदाजीने समझा यह किसी ग्रह आदिका उत्पात है। उन्होंने अपने रोते हुए लाड़ले लालको गोदमें लेकर ब्राह्मणोंसे वेदमन्त्रोंके द्वारा शान्तिपाठ कराया और फिर वे उसे स्तन पिलाने लगीं॥ ११॥
रुदन्तं सुतमादाय यशोदा ग्रहशंकिता।
कृतस्वस्त्ययनं विप्रैः सूक्तैः स्तनमपाययत्॥ ११
यशोदाजीने समझा यह किसी ग्रह आदिका उत्पात है। उन्होंने अपने रोते हुए लाड़ले लालको गोदमें लेकर ब्राह्मणोंसे वेदमन्त्रोंके द्वारा शान्तिपाठ कराया और फिर वे उसे स्तन पिलाने लगीं॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.7.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 163) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/7/11/