श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

ऊचुरव्यवसितमतीन् गोपान् गोपीश्‍च बालकाः।

रुदतानेन पादेन क्षिप्तमेतन्‍न संशयः॥ ९

ūcuravyavasitamatīn gopān gopīśca bālakāḥ|

rudatānena pādena kṣiptametanna saṃśayaḥ|| 9

अर्थ

वे इसका कोई कारण निश्‍चित न कर सके। वहाँ खेलते हुए बालकोंने गोपों और गोपियोंसे कहा कि ‘इस कृष्णने ही तो रोते-रोते अपने पाँवकी ठोकरसे इसे उलट दिया है, इसमें कोई सन्देह नहीं’॥ ९॥

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