वे इसका कोई कारण निश्चित न कर सके। वहाँ खेलते हुए बालकोंने गोपों और गोपियोंसे कहा कि ‘इस कृष्णने ही तो रोते-रोते अपने पाँवकी ठोकरसे इसे उलट दिया है, इसमें कोई सन्देह नहीं’॥ ९॥
ऊचुरव्यवसितमतीन् गोपान् गोपीश्च बालकाः।
रुदतानेन पादेन क्षिप्तमेतन्न संशयः॥ ९
वे इसका कोई कारण निश्चित न कर सके। वहाँ खेलते हुए बालकोंने गोपों और गोपियोंसे कहा कि ‘इस कृष्णने ही तो रोते-रोते अपने पाँवकी ठोकरसे इसे उलट दिया है, इसमें कोई सन्देह नहीं’॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.7.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 163) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/7/9/