श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

तत्राहुर्ब्राह्मणाः केचिदासीना ब्रह्मवादिनः।✎ 1185

पूर्वेषां पुण्ययशसां राज्ञां चाकथयन् कथाः॥ २१

tatrāhurbrāhmaṇāḥ kecidāsīnā brahmavādinaḥ|

pūrveṣāṃ puṇyayaśasāṃ rājñāṃ cākathayan kathāḥ|| 21

अर्थ

कोई-कोई व्याख्याकुशल ब्राह्मण वहाँ बैठकर वेदमन्त्रोंकी व्याख्या करते और कोई पूर्वकालीन पवित्रकीर्ति नरपतियोंके चरित्र कह-कहकर सुनाते॥ २१॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1185 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): तत्राहुर्ब्ह्मणा: → तत्राहुर्ब्राह्मणाः

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