श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

अपि स्विदद्य लोकानां त्रयाणामकुतोभयम्।

ननु भूयान् भगवतो लोकान् पर्यटतो गुणः॥ ३५

api svidadya lokānāṃ trayāṇāmakutobhayam|

nanu bhūyān bhagavato lokān paryaṭato guṇaḥ|| 35

अर्थ

‘देवर्षे! इस समय तीनों लोकोंमें कुशल-मंगल तो है न’? आप तीनों लोकोंमें विचरण करते रहते हैं, इससे हमें यह बहुत बड़ा लाभ है कि घर बैठे सबका समाचार मिल जाता है॥ ३५॥✎ 1708

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1708 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: विधि-पूर्वक → विधिपूर्वक

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें