॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.71.35
तस्मिन् सुसंकुल इभाश्वरथद्विपद्भिः
कृष्णं सभार्यमुपलभ्य गृहाधिरूढाः।
नार्यो विकीर्य कुसुमैर्मनसोपगुह्य
सुस्वागतं विदधुरुत्स्मयवीक्षितेन॥ ३५
tasmin susaṃkula ibhāśvarathadvipadbhiḥ
kṛṣṇaṃ sabhāryamupalabhya gṛhādhirūḍhāḥ|
nāryo vikīrya kusumairmanasopaguhya
susvāgataṃ vidadhurutsmayavīkṣitena|| 35
अर्थ
सड़कपर हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सेनाकी भीड़ लग रही थी। उन स्त्रियोंने अटारियोंपर चढ़कर रानियोंके सहित भगवान् श्रीकृष्णका दर्शन किया, उनके ऊपर पुष्पोंकी वर्षा की और मन-ही-मन आलिंगन किया तथा प्रेमभरी मुसकान एवं चितवनसे उनका सुस्वागत किया॥ ३५॥✎ 2130