श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

ऊचुः स्त्रियः पथि निरीक्ष्य मुकुन्दपत्‍नी-

स्तारा यथोडुपसहाः किमकार्यमूभिः।

यच्चक्षुषां पुरुषमौलिरुदारहास-

लीलावलोककलयोत्सवमातनोति॥ ३६

ūcuḥ striyaḥ pathi nirīkṣya mukundapatnī-

stārā yathoḍupasahāḥ kimakāryamūbhiḥ|

yaccakṣuṣāṃ puruṣamaulirudārahāsa-

līlāvalokakalayotsavamātanoti|| 36

अर्थ

नगरकी स्त्रियाँ राजपथपर चन्द्रमाके साथ विराजमान ताराओंके समान श्रीकृष्णकी पत्‍नियोंको देखकर आपसमें कहने लगीं—‘सखी! इन बड़भागिनी रानियोंने न जाने ऐसा कौन-सा पुण्य किया है, जिसके कारण पुरुषशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण अपने उन्मुक्त हास्य और विलासपूर्ण कटाक्षसे उनकी ओर देखकर उनके नेत्रोंको परम आनन्द प्रदान करते हैं॥ ३६॥✎ 2130

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2130 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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