॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.71.44
सुखं निवासयामास धर्मराजो जनार्दनम्।
ससैन्यं सानुगामात्यं सभार्यं च नवं नवम्॥ ४४
sukhaṃ nivāsayāmāsa dharmarājo janārdanam|
sasainyaṃ sānugāmātyaṃ sabhāryaṃ ca navaṃ navam|| 44
अर्थ
धर्मराज युधिष्ठिरने भगवान् श्रीकृष्णको उनकी सेना, सेवक, मन्त्री और पत्नियोंके साथ ऐसे स्थानमें ठहराया जहाँ उन्हें नित्य नयी-नयी सुखकी सामग्रियाँ प्राप्त हों॥ ४४॥