अर्जुनके साथ रहकर भगवान् श्रीकृष्णने खाण्डव वनका दाह करवाकर अग्निको तृप्त किया था और मयासुरको उससे बचाया था। परीक्षित्! उस मयासुरने ही धर्मराज युधिष्ठिरके लिये भगवान्की आज्ञासे एक दिव्य सभा तैयार कर दी॥ ४५॥
तर्पयित्वा खाण्डवेन वह्निं फाल्गुनसंयुतः।
मोचयित्वा मयं येन राज्ञे दिव्या सभा कृता॥ ४५
अर्जुनके साथ रहकर भगवान् श्रीकृष्णने खाण्डव वनका दाह करवाकर अग्निको तृप्त किया था और मयासुरको उससे बचाया था। परीक्षित्! उस मयासुरने ही धर्मराज युधिष्ठिरके लिये भगवान्की आज्ञासे एक दिव्य सभा तैयार कर दी॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.71.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 580) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/71/45/