श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.45

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

तर्पयित्वा खाण्डवेन वह्निं फाल्गुनसंयुतः।

मोचयित्वा मयं येन राज्ञे दिव्या सभा कृता॥ ४५

tarpayitvā khāṇḍavena vahniṃ phālgunasaṃyutaḥ|

mocayitvā mayaṃ yena rājñe divyā sabhā kṛtā|| 45

अर्थ

अर्जुनके साथ रहकर भगवान् श्रीकृष्णने खाण्डव वनका दाह करवाकर अग्‍निको तृप्त किया था और मयासुरको उससे बचाया था। परीक्षित्! उस मयासुरने ही धर्मराज युधिष्ठिरके लिये भगवान्‌की आज्ञासे एक दिव्य सभा तैयार कर दी॥ ४५॥

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