श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.46

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

उवास कतिचिन्मासान् राज्ञः प्रियचिकीर्षया।

विहरन् रथमारुह्य फाल्गुनेन भटैर्वृतः॥ ४६

uvāsa katicinmāsān rājñaḥ priyacikīrṣayā|

viharan rathamāruhya phālgunena bhaṭairvṛtaḥ|| 46

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण राजा युधिष्ठिरको आनन्दित करनेके लिये कई महीनोंतक इन्द्रप्रस्थमें ही रहे। वे समय-समयपर अर्जुनके साथ रथपर सवार होकर विहार करनेके लिये इधर-उधर चले जाया करते थे। उस समय बड़े-बड़े वीर सैनिक भी उनकी सेवाके लिये साथ-साथ जाते॥ ४६॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे उत्तरार्धे
कृष्णस्येन्द्रप्रस्थगमनं नामैकसप्ततितमोऽध्यायः॥ ७१॥

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