श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

ब्रह्मवेषधरो गत्वा तं भिक्षेत वृकोदरः।

हनिष्यति न सन्देहो द्वैरथे तव सन्‍निधौ॥ ७

brahmaveṣadharo gatvā taṃ bhikṣeta vṛkodaraḥ|

haniṣyati na sandeho dvairathe tava sannidhau|| 7

अर्थ

इसलिये भीमसेन ब्राह्मणके वेषमें जायँ और उससे युद्धकी भिक्षा माँगें। भगवन्! इसमें सन्देह नहीं कि यदि आपकी उपस्थितिमें भीमसेन और जरासन्धका द्वन्द्वयुद्ध हो, तो भीमसेन उसे मार डालेंगे॥ ७॥

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