श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

किं दुर्मर्षं तितिक्षूणां किमकार्यमसाधुभिः।

किं न देयं वदान्यानां कः परः समदर्शिनाम्॥ १९

kiṃ durmarṣaṃ titikṣūṇāṃ kimakāryamasādhubhiḥ|

kiṃ na deyaṃ vadānyānāṃ kaḥ paraḥ samadarśinām|| 19

अर्थ

तितिक्षु पुरुष क्या नहीं सह सकते। दुष्ट पुरुष बुरा-से-बुरा क्या नहीं कर सकते। उदार पुरुष क्या नहीं दे सकते और समदर्शीके लिये पराया कौन है?॥ १९॥

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