जरासन्धने यह कहकर भीमसेनको एक बहुत बड़ी गदा दे दी और स्वयं दूसरी गदा लेकर नगरसे बाहर निकल आया॥ ३३॥
इत्युक्त्वा भीमसेनाय प्रादाय महतीं गदाम्।
द्वितीयां स्वयमादाय निर्जगाम पुराद् बहिः॥ ३३
जरासन्धने यह कहकर भीमसेनको एक बहुत बड़ी गदा दे दी और स्वयं दूसरी गदा लेकर नगरसे बाहर निकल आया॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 584) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/72/33/