॥ श्रीहरिः ॥
ततः समे खले वीरौ संयुक्तावितरेतरौ।
जघ्नतुर्वज्रकल्पाभ्यां गदाभ्यां रणदुर्मदौ॥ ३४
tataḥ same khale vīrau saṃyuktāvitaretarau|
jaghnaturvajrakalpābhyāṃ gadābhyāṃ raṇadurmadau|| 34
अर्थ
अब दोनों रणोन्मत्त वीर अखाड़ेमें आकर एक-दूसरेसे भिड़ गये और अपनी वज्रके समान कठोर गदाओंसे एक-दूसरेपर चोट करने लगे॥ ३४॥
ततः समे खले वीरौ संयुक्तावितरेतरौ।
जघ्नतुर्वज्रकल्पाभ्यां गदाभ्यां रणदुर्मदौ॥ ३४
अब दोनों रणोन्मत्त वीर अखाड़ेमें आकर एक-दूसरेसे भिड़ गये और अपनी वज्रके समान कठोर गदाओंसे एक-दूसरेपर चोट करने लगे॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 584) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/72/34/