श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.45

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

एकं पादं पदाऽऽक्रम्य दोर्भ्यामन्यं प्रगृह्य सः।

गुदतः पाटयामास शाखामिव महागजः॥ ४५

ekaṃ pādaṃ padā''kramya dorbhyāmanyaṃ pragṛhya saḥ|

gudataḥ pāṭayāmāsa śākhāmiva mahāgajaḥ|| 45

अर्थ

फिर उसके एक पैरको अपने पैरके नीचे दबाया और दूसरेको अपने दोनों हाथोंसे पकड़ लिया। इसके बाद भीमसेनने उसे गुदाकी ओरसे इस प्रकार चीर डाला, जैसे गजराज वृक्षकी डाली चीर डाले॥ ४५॥

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