श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.73.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 73 · अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

कृष्णसन्दर्शनाह्लादध्वस्तसंरोधनक्लमाः ।

प्रशशंसुर्हृषीकेशं गीर्भिः प्रांजलयो नृपाः॥ ७

kṛṣṇasandarśanāhlādadhvastasaṃrodhanaklamāḥ |

praśaśaṃsurhṛṣīkeśaṃ gīrbhiḥ prāṃjalayo nṛpāḥ|| 7

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णके दर्शनसे उन राजाओंको इतना अधिक आनन्द हुआ कि कैदमें रहनेका क्लेश बिलकुल जाता रहा। वे हाथ जोड़कर विनम्र वाणीसे भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति करने लगे॥ ७॥

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