श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

विविधानीह कर्माणि जनयन् यदवेक्षया।

ईहते यदयं सर्वः श्रेयो धर्मादिलक्षणम्॥ २२

vividhānīha karmāṇi janayan yadavekṣayā|

īhate yadayaṃ sarvaḥ śreyo dharmādilakṣaṇam|| 22

अर्थ

सारा जगत् श्रीकृष्णके ही अनुग्रहसे अनेकों प्रकारके कर्मका अनुष्ठान करता हुआ धर्म, अर्थ, काम और मोक्षरूप पुरुषार्थोंका सम्पादन करता है॥ २२॥

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