श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

तस्मात् कृष्णाय महते दीयतां परमार्हणम्।

एवं चेत् सर्वभूतानामात्मनश्‍चार्हणं भवेत्॥ २३

tasmāt kṛṣṇāya mahate dīyatāṃ paramārhaṇam|

evaṃ cet sarvabhūtānāmātmanaścārhaṇaṃ bhavet|| 23

अर्थ

इसलिये सबसे महान् भगवान् श्रीकृष्णकी ही अग्रपूजा होनी चाहिये। इनकी पूजा करनेसे समस्त प्राणियोंकी तथा अपनी भी पूजा हो जाती है॥ २३॥

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