श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

साधयित्वा क्रतुं राज्ञः कृष्णो योगेश्‍वरेश्‍वरः।

उवास कतिचिन्मासान् सुहृद्भिरभियाचितः॥ ४८

sādhayitvā kratuṃ rājñaḥ kṛṣṇo yogeśvareśvaraḥ|

uvāsa katicinmāsān suhṛdbhirabhiyācitaḥ|| 48

अर्थ

परीक्षित्! इस प्रकार योगेश्‍वरेश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णने धर्मराज युधिष्ठिरका राजसूय यज्ञ पूर्ण किया और अपने सगे-सम्बन्धी और सुहृदोंकी प्रार्थनासे कुछ महीनोंतक वहीं रहे॥ ४८॥

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