इसके बाद राजा युधिष्ठिरकी इच्छा न होनेपर भी सर्व-शक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णने उनसे अनुमति ले ली और अपनी रानियों तथा मन्त्रियोंके साथ इन्द्रप्रस्थसे द्वारकापुरीकी यात्रा की॥ ४९॥
ततोऽनुज्ञाप्य राजानमनिच्छन्तमपीश्वरः।
ययौ सभार्यः सामात्यः स्वपुरं देवकीसुतः॥ ४९
इसके बाद राजा युधिष्ठिरकी इच्छा न होनेपर भी सर्व-शक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णने उनसे अनुमति ले ली और अपनी रानियों तथा मन्त्रियोंके साथ इन्द्रप्रस्थसे द्वारकापुरीकी यात्रा की॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.74.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 596) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/74/49/