श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

यत्र यत्रोपलक्ष्येत ससौभः सहसैनिकः।

शाल्वस्ततस्ततोऽमुंचन् शरान् सात्वतयूथपाः॥ २३

yatra yatropalakṣyeta sasaubhaḥ sahasainikaḥ|

śālvastatastato'muṃcan śarān sātvatayūthapāḥ|| 23

अर्थ

शाल्व अपने विमान और सैनिकोंके साथ जहाँ-जहाँ दिखायी पड़ता, वहीं-वहीं यदुवंशी सेनापति बाणोंकी झड़ी लगा देते थे॥ २३॥

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