विना मत् क्लीबचित्तेन सूतेन प्राप्तकिल्बिषात्३॥ २९
na yadūnāṃ kule jātaḥ śrūyate raṇavicyutaḥ|
vinā mat klībacittena sūtena prāptakilbiṣāt|| 29
अर्थ
सूत! हमने ऐसा कभी नहीं सुना कि हमारे वंशका कोई भी वीर कभी रणभूमि छोड़कर अलग हट गया हो! यह कलंकका टीका तो केवल मेरे ही सिर लगा। सचमुच सूत! तू कायर है, नपुंसक है॥ २९॥
न यदूनां कुले जातः श्रूयते रणविच्युतः।
विना मत् क्लीबचित्तेन सूतेन प्राप्तकिल्बिषात्॥ २९
सूत! हमने ऐसा कभी नहीं सुना कि हमारे वंशका कोई भी वीर कभी रणभूमि छोड़कर अलग हट गया हो! यह कलंकका टीका तो केवल मेरे ही सिर लगा। सचमुच सूत! तू कायर है, नपुंसक है॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.76.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 605) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/76/29/