श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

किं नु वक्ष्येऽभिसंगम्य पितरौ रामकेशवौ।

युद्धात् सम्यगपक्रान्तः पृष्टस्तत्रात्मनः क्षमम्॥ ३०

kiṃ nu vakṣye'bhisaṃgamya pitarau rāmakeśavau|

yuddhāt samyagapakrāntaḥ pṛṣṭastatrātmanaḥ kṣamam|| 30

अर्थ

बतला तो सही, अब मैं अपने ताऊ बलरामजी और पिता श्रीकृष्णके सामने जाकर क्या कहूँगा? अब तो सब लोग यही कहेंगे न, कि मैं युद्धसे भग गया? उनके पूछनेपर मैं अपने अनुरूप क्या उत्तर दे सकूँगा’॥ ३०॥

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