श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

एतावदुक्त्वा भगवान् निवृत्तोऽसद्वधादपि।

भावित्वात्तं कुशाग्रेण करस्थेनाहनत् प्रभुः॥ २८

etāvaduktvā bhagavān nivṛtto'sadvadhādapi|

bhāvitvāttaṃ kuśāgreṇa karasthenāhanat prabhuḥ|| 28

अर्थ

भगवान् बलराम यद्यपि तीर्थयात्राके कारण दुष्टोंके वधसे भी अलग हो गये थे, फिर भी इतना कहकर उन्होंने अपने हाथमें स्थित कुशकी नोकसे उनपर प्रहार कर दिया और वे तुरंत मर गये। होनहार ही ऐसी थी॥ २८॥

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