श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

हाहेति वादिनः सर्वे मुनयः खिन्‍नमानसाः।

ऊचुः संकर्षणं देवमधर्मस्ते कृतः प्रभो॥ २९

hāheti vādinaḥ sarve munayaḥ khinnamānasāḥ|

ūcuḥ saṃkarṣaṇaṃ devamadharmaste kṛtaḥ prabho|| 29

अर्थ

सूतजीके मरते ही सब ऋषि-मुनि हाय-हाय करने लगे, सबके चित्त खिन्‍न हो गये। उन्होंने देवाधिदेव भगवान् बलरामजीसे कहा—‘प्रभो! आपने यह बहुत बड़ा अधर्म किया॥ २९॥

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