श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

अस्य ब्रह्मासनं दत्तमस्माभिर्यदुनन्दन।

आयुश्‍चात्माक्लमं तावद् यावत् सत्रं समाप्यते॥ ३०

asya brahmāsanaṃ dattamasmābhiryadunandana|

āyuścātmāklamaṃ tāvad yāvat satraṃ samāpyate|| 30

अर्थ

यदुवंशशिरोमणे! सूतजीको हम लोगोंने ही ब्राह्मणोचित आसनपर बैठाया था और जबतक हमारा यह सत्र समाप्त न हो, तबतकके लिये उन्हें शारीरिक कष्टसे रहित आयु भी दे दी थी॥ ३०॥

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