जैसे महावत अंकुशसे हाथीको घायल करता है, वैसे ही दन्तवक्त्रने अपनी कड़वी बातोंसे श्रीकृष्णको चोट पहुँचानेकी चेष्टा की और फिर वह उनके सिरपर बड़े वेगसे गदा मारकर सिंहके समान गरज उठा॥ ७॥
एवं रूक्षैस्तुदन् वाक्यैः कृष्णं तोत्त्रैरिव द्विपम्।
गदयाताडयन्मूर्ध्नि सिंहवद् व्यनदच्च सः॥ ७
जैसे महावत अंकुशसे हाथीको घायल करता है, वैसे ही दन्तवक्त्रने अपनी कड़वी बातोंसे श्रीकृष्णको चोट पहुँचानेकी चेष्टा की और फिर वह उनके सिरपर बड़े वेगसे गदा मारकर सिंहके समान गरज उठा॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 611) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/78/7/