श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.79.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 79 · अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः

ऋषभाद्रिं हरेः क्षेत्रं दक्षिणां मथुरां तथा।

सामुद्रं सेतुमगमन्महापातकनाशनम्॥ १५

ṛṣabhādriṃ hareḥ kṣetraṃ dakṣiṇāṃ mathurāṃ tathā|

sāmudraṃ setumagamanmahāpātakanāśanam|| 15

अर्थ

वहाँसे उन्होंने विष्णुभगवान्‌के क्षेत्र ऋषभ पर्वत, दक्षिण मथुरा तथा बड़े-बड़े महापापोंको नष्ट करनेवाले सेतुबन्धकी यात्रा की॥ १५॥

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