॥ श्रीहरिः ॥
ऋषभाद्रिं हरेः क्षेत्रं दक्षिणां मथुरां तथा।
सामुद्रं सेतुमगमन्महापातकनाशनम्॥ १५
ṛṣabhādriṃ hareḥ kṣetraṃ dakṣiṇāṃ mathurāṃ tathā|
sāmudraṃ setumagamanmahāpātakanāśanam|| 15
अर्थ
वहाँसे उन्होंने विष्णुभगवान्के क्षेत्र ऋषभ पर्वत, दक्षिण मथुरा तथा बड़े-बड़े महापापोंको नष्ट करनेवाले सेतुबन्धकी यात्रा की॥ १५॥
ऋषभाद्रिं हरेः क्षेत्रं दक्षिणां मथुरां तथा।
सामुद्रं सेतुमगमन्महापातकनाशनम्॥ १५
वहाँसे उन्होंने विष्णुभगवान्के क्षेत्र ऋषभ पर्वत, दक्षिण मथुरा तथा बड़े-बड़े महापापोंको नष्ट करनेवाले सेतुबन्धकी यात्रा की॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 616) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/15/