श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.79.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 79 · अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः

संस्तुत्य मुनयो रामं प्रयुज्यावितथाशिषः।

अभ्यषिंचन् महाभागा वृत्रघ्नं विबुधा यथा॥ ७

saṃstutya munayo rāmaṃ prayujyāvitathāśiṣaḥ|

abhyaṣiṃcan mahābhāgā vṛtraghnaṃ vibudhā yathā|| 7

अर्थ

नैमिषारण्यवासी महाभाग्यवान् मुनियोंने बलरामजीकी स्तुति की, उन्हें कभी न व्यर्थ होनेवाले आशीर्वाद दिये और जैसे देवतालोग देवराज इन्द्रका अभिषेक करते हैं, वैसे ही उनका अभिषेक किया॥ ७॥

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